Wednesday, July 17, 2024

आखिर क्यों कुछ लोग नजर आते हैं ज्यादा ही सफेद, इस बीमारी में आंखों को भी होता है खतरा

हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग नजर आते हैं जिनकी त्वचा का रंग काफी सफेद या हल्के गुलाबी रंग का नजर आता है. कई बार उनके बालों और आंखों का रंग भी आम लोगों से कुछ अलग होता है. ऐसा एल्बिनिज्म (रंजकहीनता) नामक बीमारी के कारण हो सकता है. इस बीमारी को लेकर कई तरह की धारणाएं हैं. अक्सर इस बीमारी से पीड़ित लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है. जबकि वैज्ञानिक रूप से यह संक्रामक नहीं जेनेटिक डिसआर्डर (Genetic disorder ) से जुड़ी बीमारी है. लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 13 जून को इंटरनेशनल एल्बिनिज्म अवेयरनेस डे (International Albinism Awareness Day) मनाया जाता है. एल्बिनिज्म या रंगहीनता एक तरह का जेनेटिक डिसऑर्डर यानी वंशानुगत बीमारी है. जिसमें पीड़ित व्यक्ति के शरीर में मेलानिन (Melanin) नामक तत्व का निर्माण कम या बिल्कुल नहीं होता है, जिससे पीड़ित की त्वचा का रंग सफेद नजरआने लगता है.

क्या है एल्बिनिज्म ( What is Albinism)
एल्बिनिज्म (रंगहीनता) एक जेनेटिक डिसऑर्डर है. इसमें बॉडी में मेलेनिन नामक पिंगमेंट का बहुत कम या बिलकुल उत्पादन नहीं होता है. किसी भी व्यक्ति की त्वचा, बालों और आंखों का रंग मेलेनिन की मात्रा पर ही निर्भर करती है. इसके साथ ही मेलेनिन आंखों से जुड़ी नसों के विकास में भी अहम भूमिका निभाती है, इसलिए ऐल्बिनिज्म से ग्रस्त लोगों को दृष्टि संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. यह एक जेनेटिक समस्या है, जो पैरेंट्स के जरिए बच्चों को हो सकता है. त्वचा, बाल, आंखों को रंग प्रदान करने वाले मेलेनिन के घटने से भी बीमारी शुरू हो सकती है. किसी-किसी में ये परेशानी जन्म से ही नजर आने लगती है.

हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग नजर आते हैं जिनकी त्वचा का रंग काफी सफेद या हल्के गुलाबी रंग का नजर आता है. कई बार उनके बालों और आंखों का रंग भी आम लोगों से कुछ अलग होता है. ऐसा एल्बिनिज्म (रंजकहीनता) नामक बीमारी के कारण हो सकता है. इस बीमारी को लेकर कई तरह की धारणाएं हैं. अक्सर इस बीमारी से पीड़ित लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है. जबकि वैज्ञानिक रूप से यह संक्रामक नहीं जेनेटिक डिसआर्डर (Genetic disorder ) से जुड़ी बीमारी है. लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 13 जून को इंटरनेशनल एल्बिनिज्म अवेयरनेस डे (International Albinism Awareness Day) मनाया जाता है. एल्बिनिज्म या रंगहीनता एक तरह का जेनेटिक डिसऑर्डर यानी वंशानुगत बीमारी है. जिसमें पीड़ित व्यक्ति के शरीर में मेलानिन (Melanin) नामक तत्व का निर्माण कम या बिल्कुल नहीं होता है, जिससे पीड़ित की त्वचा का रंग सफेद नजरआने लगता है.

क्या है एल्बिनिज्म ( What is Albinism)
एल्बिनिज्म (रंगहीनता) एक जेनेटिक डिसऑर्डर है. इसमें बॉडी में मेलेनिन नामक पिंगमेंट का बहुत कम या बिलकुल उत्पादन नहीं होता है. किसी भी व्यक्ति की त्वचा, बालों और आंखों का रंग मेलेनिन की मात्रा पर ही निर्भर करती है. इसके साथ ही मेलेनिन आंखों से जुड़ी नसों के विकास में भी अहम भूमिका निभाती है, इसलिए ऐल्बिनिज्म से ग्रस्त लोगों को दृष्टि संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. यह एक जेनेटिक समस्या है, जो पैरेंट्स के जरिए बच्चों को हो सकता है. त्वचा, बाल, आंखों को रंग प्रदान करने वाले मेलेनिन के घटने से भी बीमारी शुरू हो सकती है. किसी-किसी में ये परेशानी जन्म से ही नजर आने लगती है.

लक्षण ( Symptoms of Albinism)
एल्बिनिज्म के लक्षण अलग-अलग नज़र आ सकते हैं. आमतौर पर त्वचा, बालों और आंखों के रंग से एल्बिनिज्म की पहचान होती है. ऐल्बिनिज्म से पीड़ित लोग सन रेज के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें त्वचा कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. इस बीमारी के कारण स्किन, बालों और आंखों का रंग परिवार के दूसरे सदस्यों के मुकाबले हल्के रंग का हो जाता है. इसके साथ ही सूरज के कारण स्किन पर झाइयों की समस्या होना, बिना पिग्मेंट या पिग्मेंट के साथ तिल या मोल्स होना, बड़े झाईं जैसे धब्बे, सनबर्न, बालों का रंग भूरा, पीला होना, भौंह और बरौनियों का रंग पीला या गोल्डन होना जैसे लक्षण नजर आते हैं.

एल्बिनिज्म का इलाज और बचाव (Treatment and prevention of albinism)
एल्बिनिज्म का फिलहाल इलाज उपलब्ध नहीं है. इससे पीड़ित ग्रस्त लोग त्वचा और आंखों को सुरक्षित रखने और दृष्टि क्षमता को बढ़ाने के लिए कुछ खास उपाय आजमा सकते हैं. त्वचा, बालों और आंखों के रंग में बदलाव नजर आने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. नवजात में ये लक्षण दिखें तो भी डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है.

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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