Tuesday, July 23, 2024

इस जगह सूर्य होता है सबसे पहले उदयमान, कुदरत के खूबसूरत नजारे देखने दूर दूर से आते हैं पर्यटक, आप भी जाये इस जगह…

सिंगरौली के माडा स्थित इन गुफाओं में रामायण काल के कई साक्ष्य मिलते हैं. ये गुफाएं न केवल रॉक कट स्थापत्य कला के सुंदर उदाहरण हैं बल्कि प्रतिमा-चित्रण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं.

सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढ़न से 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित माडा में 10 किलोमीटर तक फैला हुआ एक विशाल जंगल है. ऐसी मान्यता है कि इसी जंगल की एक गुफा में रावण ने मंदोदरी के साथ विवाह रचाया था. रावण माडा गुफा में नटराजन की नृत्य करती मूर्ति, पत्थर ढोते वानरों के चित्र, देवी देवताओं के चित्र के साथ बने रहन-सहन कक्ष भी प्राचीन सभ्यता की कहानी कहते नजर आते हैं. वैसे तो माड़ा के जंगल मे अनेकों गुफाएं हैं लेकिन इसे रामायण काल से जोड़ने वाली सिर्फ रावण गुफा है.

वन विभाग के सिंगरौली डीएफओ वी मधु राज बताते हैं कि विवाह माड़ा की मुख्य गुफा में वास्तु शास्त्र के महामंडप की चित्रकारी के निशान मिलते हैं. मंडप के पीछे चार प्रवेश द्वार वाला केन्द्रीय गर्भगृह है. यह संरचनात्मक मंदिर वास्तुकला को दर्शाता है. काफी विद्वानों ने यहां वास्तुकला का अध्ययन किया है. उल्लेखनीय है कि माडा गुफाओं का विशेष महत्व है, यहां की रावण गुफा में भी कई निशान मिले हैं जो रामायण काल में कई कड़ियों को जोड़ते हैं.

सिंगरौली भारत के मध्य में वन क्षेत्र में स्थित है और पहाड़ियों, पहाड़ों, नदियों और घाटियों से घिरा हुआ है. इन्हीं पहाड़ियों के बीच स्थित है माडा गुफाएं. ये गुफाएं न केवल रॉक कट स्थापत्य कला के सुंदर उदाहरण है बल्कि प्रतिमा-चित्रण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. इन गुफाओं की एक शृंखला है जिन्हें विवाह माडा, गणेश माडा, जल जलिया माडा आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है. यही वजह है कि यहां पर्यटक दूर दूर से यहाँ की खूबसूरती और नजारें को देखने के लिए आते है.

सिंगरौली जिले के माड़ा गांव में सूरज सबसे पहले उदयीमान होता है. सिंगरौली मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है. महान जंगल और सुंदर स्थलों के कारण पर्यटकों को जगह आकर्षित करती है. सिंगरौली जिले का माड़ा गांव प्राकृतिक सौंदर्य से भरा हुआ है. गांव में पुरातात्विक महत्व की गुफाएं, शैलचित्र, मनमोहक झरने तालाब, जलप्रपात का नजारा मनोरम दृश्य पेश करता है. ऊंचे पर्वत से सूर्य का नजारा भी बेहद खास होता है. लगभग 609 मीटर की ऊंचाई पर बसे माड़ा गांव में सूर्य की किरणें सबसे पहले धरती पर आती दिखाई देती हैं.

इससे पहले यह क्षेत्र के केवल प्राचीन काल की गुफाओं के लिए ही जाना जाता रहा है, लेकिन अब गुफाओं के अलावा पार्क की एडवेंचर गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्थाएं भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रही है. वर्तमान में वहां हर रोज 500 से अधिक पर्यटक पहुंच रहे हैं.

पूर्व में जहां घना जंगल होने के चलते लोग वहां जाने से कतराते थे, लेकिन अब इको पार्क में सैकड़ों पर्यटकों की भीड़ जमा होती है. वन विभाग को पार्क से हर महीने 2 से ढाई लाख रुपए तक का राजस्व प्राप्त हो रहा है. वर्ष 2019 से शुरू माड़ा इको पार्क में केवल कोविड आपदा के दौरान सन्नाटा था. इसके अलावा वहां महीने के हर दिन पर्यटक पहुंचते हैं. रविवार सहित अन्य अवकाश के दिन पर्यटकों की संख्या दो गुना होती है.

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