Wednesday, July 17, 2024

सावधान, कहीं आप भी तो स्नान के समय नहीं कर रहे ये गलती, छिन जाएगा सुख-चैन …

पुराणों में मनुष्य कल्याण के लिए स्नान के कुछ खास नियम बताए गए हैं. इनका पालन न करने वाले पाप के भागीदार बनते हैं, साथ ही सुख, संपत्ति, समृद्धि छिन जाते हैं.

बिष्णु पुराण के बारहवें अध्याय में कहा गया है कि मनुष्य को कभी निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए. स्नान के समय शरीर पर एक कपड़ा होना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार नग्न अवस्था में स्नान करने से पितृ दोष लग सकता है.

पौरणिक कथा के अनुसार जब सरोवर में गोपियां निर्वस्त्र होकर स्नान कर रही थी तब कृष्ण अपनी लीला से उनके वस्त्र हरण कर लेते थे. कान्हा गोपियों को निर्वस्त्र होकर स्नान करने पर मना करते थे. एक बार कृष्ण ने गोपियों को समझाते हुए कहा था कि निर्वस्त्र होकर स्नान करने से वरुण देवता (जल देवता) का अपमान होता है.

शास्त्रों के अनुसार वातावरण में कई प्रकार के जीवन सूक्ष्म रूप में मौजूद रहते हैं, ऐसे में निर्वस्त्र होकर नहाने से दोष लगता है, जिससे व्यक्ति का सुख और धन नष्ट होने लगता है.

कहते हैं नग्न अवस्था में नहाने से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है, जो आपके मानसिक स्थिति पर बुरा असर डालती है.

पुराण के अनुसार कभी भी नग्न होकर सोना नहीं चाहिए. ऐसा करने से चंद्र देवता का अपमान होता है. पितर भी नाराज होते हैं.

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