Saturday, July 13, 2024

केदारनाथ धाम में हिमस्खलन होने से अटकीं भक्तों की सांसें, जानें- बार-बार क्यों हो रही ये घटना…

उत्तराखंड (Uttarakhand) में केदारनाथ धाम के मंदिर के पीछे बर्फीली चोटियों पर एक बार फिर एवलांच आने से श्रद्धालुओं की सांसे अटक गईं. गनीमत रही कि किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ. एवलांच केदारनाथ धाम से लगभग तीन-चार किलोमीटर दूर था. पिछले यात्रा सीजन में बर्फीली पहाड़ियों पर तीन बार हिमस्खलन हुआ था. इस बार भी अप्रैल माह में एवलांच की घटना सामने आई थी. केदारनाथ धाम में यात्रा की शुरुआत से मौसम खराब रहा है. धाम में लगातार बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश जारी है. मई महीने में पैदल यात्रा मार्ग पर जगह-जगह ग्लेशियर भी टूटे और यात्रा भी प्रभावित रही. अप्रैल के बाद अब जून में एवलांच आया है.

केदारनाथ धाम से तीन-चार किमी दूर स्थित बर्फीली पहाड़ियों पर आज सुबह एवलांच हुआ. चोटियों से बर्फ पिघलकर बहने लगी. एवलांच केदारनाथ धाम से दूर होने के कारण जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. पिछले साल की यात्रा में तीन बार हिमालयी पर्वतों पर एवलांच की घटनाएं सामने आईं थी. उस दौरान भी कोई नुकसान नहीं हुआ था. केदारनाथ धाम में बार-बार एवलांच आने पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है. पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र बद्री ने कहा कि केदारनाथ धाम आस्था का केंद्र है. उन्होंने आरोप लगाया कि हेली कंपनियां एनजीटी के मानकों का पालन नहीं कर रही हैं.

बार-बार क्यों हो रही एवलांच की घटना?

देवराघवेन्द्र बद्री ने कहा कि हेली सेवाओं की गरज से ग्लेशियर चटक रहे हैं. अभ्यारण्य के वन्य जीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है. लगातार शटल सेवाएं चल रही हैं. सुबह के समय वायु सेना का चिनूक हेलीकॉप्टर भी पुनर्निर्माण का सामान केदारनाथ धाम ला रहा है. हेलीकॉप्टर की गर्जना से ग्लेशियरों के चटकने के मामले भी सामने आए हैं. केदारनाथ का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है. उन्होंने एनजीटी और शासन-प्रशासन से आग्रह किया कि हिमालय बचाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं को नियंत्रण किया जाना जरूरी है.

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