Wednesday, July 17, 2024

चलो बात करते हैं, भगवान भी नहीं बचे, केदारनाथ मंदिर से 23 किलो सोना चोरी….

केदारनाथ मंदिर सोना घोटाला: केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित और चारधाम महापंचायत के उपाध्यक्ष संतोष त्रिवेदी ने मंदिर को दान में मिले 23.78 किलोग्राम सोने की चोरीका आरोप लगाया है मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर मुंबई के एक व्यापारी द्वारा दान किया गया सोना परत के रूप में लगाया गया था।

एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, त्रिवेदी का आरोप है कि मंदिर के गर्भगृह में सोना लगाने का काम पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में किया गया था. जब सोने की प्लेटें लगाई गईं तो अब उन्हें चमकाने की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए इसकी जांच जरूरी है।

वहीं, कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मंत्री नवप्रभात का कहना है कि एक दानदाता ने घटना पर संदेह जताया है. कितना सोना दान किया गया? सोने को ताँबे से क्यों मिलाया गया? ऐसे कई सवाल हैं. सिर्फ केदारनाथ ही नहीं बद्रीनाथ में भी ऐसे घोटाले सामने आ रहे हैं.

बढ़ते विवाद के बीच अब उत्तराखंड सरकार ने संस्कृति एवं धार्मिक मामलों के सचिव हरिचंद्र सैमवाल और गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की है. प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने शुक्रवार को बताया कि समिति में विशेषज्ञों के साथ स्वर्णकार भी होंगे। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विवाद बढ़ने पर सतपाल ने कहा कि सोने की परत चढ़ाने का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की देखरेख में किया गया था। एक दानकर्ता ने सोना खरीदा और उसे गर्भगृह की दीवारों पर लगवा दिया। इसमें मंदिर समिति की कोई सीधी भूमिका नहीं थी. काम पूरा होने के बाद इसका बिल और अन्य दस्तावेज दानदाता ने मंदिर समिति को सौंप दिए। विपक्षी दल जबरन इस मुद्दे को उछालकर चारधाम यात्रा को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।

इससे पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने आरोपों को झूठा बताया था। समिति ने कहा कि गर्भगृह में 23.78 किलोग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया है. तांबे की प्लेट का उपयोग सोना चढ़ाने के लिए आधार के रूप में किया गया है। इसका कुल वजन 1 हजार किलो से ज्यादा था, जिसकी कीमत 29 लाख रुपये थी.

18 जून को गौतम नौटियाल नाम के ट्विटर हैंडल से मंदिर के गर्भगृह में पॉलिश करने का वीडियो शेयर किया गया. जिसमें कुछ कारीगर गर्भगृह में सोने को चमकाते नजर आ रहे थे. वीडियो बनाने वाला शख्स इन लोगों से पॉलिश करने का कारण पूछता नजर आ रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कारीगरों से यह भी सवाल किया कि मंदिर बंद होने के बाद यह काम रात में क्यों किया जाता है।

वीडियो सामने आने के बाद तीर्थ पुरोहितों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है. वह पहले से ही सोना चढ़ाने के ख़िलाफ़ थे। संतोष त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि केदारनाथ धाम में लगा 23 किलो सोना चोरी हो गया, क्योंकि जब सोने की प्लेटें लगाई गईं तो उन्हें चमकाने की कोई जरूरत नहीं थी। गर्भगृह की दीवारों पर केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह काम गुपचुप तरीके से किया जा रहा है. इसकी जानकारी न तो पुरातत्व विभाग को थी और न ही तीर्थ के पुजारियों को। अब इसकी जांच जरूरी हो गई है.

अक्टूबर 2022 में पूरा हुआ सोना चढ़ाने का काम

केदारनाथ में सोना चढ़ाने का काम पिछले साल सितंबर से अक्टूबर के बीच पूरा किया गया था. इससे पहले मुंबई के एक कारोबारी ने मंदिर समिति को 23 किलो सोना दान में दिया था. जिसके बाद गर्भगृह की दीवारों और छत को 550 सोने की प्लेटों से ढक दिया गया। सोना चढ़ाने का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दो अधिकारियों की देखरेख में किया गया था। इस काम को 19 कारीगरों ने पूरा किया।

सोना चढ़ाने का काम विशेषज्ञों की देखरेख में किया गया।

सोना चढ़ाने से पहले आईआईटी रूड़की, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च रूड़की और एएसआई की 6 सदस्यीय टीम ने केदारनाथ का दौरा किया और गर्भगृह का निरीक्षण किया। उनकी रिपोर्ट के बाद ही सोना चढ़ाने का काम शुरू किया गया। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय के मुताबिक 3 दिन में काम पूरा कर लिया गया.

सितंबर 2022 में जब खबर आई कि केदारनाथ धाम को सोने से सजाया जाएगा तो इसका जमकर विरोध हुआ. तीर्थ के पुजारी आचार्य संतोष त्रिवेदी ने कहा कि केदारनाथ मोक्ष है और मोक्ष में सोना नहीं मढ़ा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि परत लगाने के लिए ड्रिल मशीन का इस्तेमाल किया गया, जिससे गर्भगृह की पांडवकालीन दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं.

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