Wednesday, July 17, 2024

सोने की कीमतों में हुआ बड़ा बदलाव, इस हफ्ते इतने रुपये पहुंचा भाव…

सोने की कीमतों (Gold Price) में लगातार दूसरे सप्ताह तेजी देखने को मिली. जून के महीने में आई लगातार गिरावट के बाद जुलाई में गोल्ड की कीमतें (Weekly Gold Price) चमकनी शुरू हो गई हैं और ये 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े करीब नजर आने लगी हैं. इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सोने की कीमतें 59,352 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर बंद हुईं. वहीं, पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन गोल्ड का भाव (Gold Rate) 58,531 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था.

इस सप्ताह ऐसा रहा गोल्ड का भाव

IBJA Rates के अनुसार, इस सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सोने की कीमतें 58,648 रुपये पर बंद हुईं. मंगलवार को भाव में हल्की तेजी देखने को मिली और ये 58,713 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ. बुधवार को सोने का भाव 58,887 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर क्लोज हुआ. गुरुवार को गोल्ड के भाव 59 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर गया और ये 59,329 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. शुक्रवार को गोल्ड 59,352 रुपये पर क्लोज हुआ.

कितना महंगा हुआ गोल्ड?

पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को गोल्ड की कीमतें 58,531 रुपये पर बंद हुई थीं. इस तरह गोल्ड की कीमतें इस सप्ताह 821 रुपये प्रति 10ग्राम बढ़ी हैं. इस हफ्ते शुक्रवार को सोना सबसे महंगा 59,352 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिका और सोमवार को कीमतें सबसे कम 58,648 रुपये प्रति 10 ग्राम रहीं.

24 कैरेट वाले सोने का दाम

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट वाले सोने का दाम 13 जुलाई 2023 को अधिकतम 59,322 रुपये रहा. वहीं, 22 कैरेट वाले गोल्ड का भाव 59,091 रुपये रहा. सभी तरह के गोल्ड के रेट की गणना टैक्स के बिना की गई है. सोने पर जीएसटी शुल्क अलग से देना होता है. इसके अलावा गहने पर मेकिंग चार्ज देना पड़ता है. डियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (Indian Bullion Jewelers Association) की ओर से जारी कीमतों से अलग-अलग प्योरिटी के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है.

अब तक कितना बढ़ा सोने का भाव?

मॉनिटरी सख्ती, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और लगातार मुख्य मुद्रास्फीति से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद 2023 में अब तक सोने की कीमतें 8 प्रतिशत बढ़ी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कीमती धातु के लिए आउटलुक आशाजनक है. इसका मुख्य कारण मुद्रास्फीति का दबाव कम होना है.

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