Saturday, July 13, 2024

इस फूल को मिला है शिव का श्राप, सावन की पूजा में भूलकर भी न करें इस्तेमाल….

महादेव इतने भोले हैं कि श्रद्धा भाव से उन्हें जो भी चीजें अर्पित की जाएं वह उसे स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन एक ऐसा फूल है जो शिव पूजा में वर्जित माना जाता है. इस महादेव का श्राप है.

हिंदू धर्म में हर देवी-देवताओं की पूजा में उनकी प्रिय चीजें अर्पित करने का विधान है. मान्यता है इससे ईष्ट देव जल्द प्रसन्न होते हैं. शास्त्रों के अनुसार केतकी का फूल विष्णु जी का प्रिय माना जाता है लेकिन शिव जी की पूजा में केतकी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. कहते हैं इस फूल से उनकी पूजा की जाए तो वह उसे स्वीकार नहीं करते.

केतकी के फूल को श्राप क्यों मिला इसके पीछे पौराणकि कथा है. कथा के अनुसार एक बार ब्रह्म जी और विष्णु जी में इस बात को लेकर विवाद हो गया कि दोनों में कौन सर्वश्रेष्ठ है.

इसके बाद भगवान शिव ने एक ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति की और कहा कि जो इस ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत खोज लेगा, वह श्रेष्ठ कहा जाएगा. ब्रह्मा जी ज्योतिर्लिंग का आरंभ खोजने नीचे की ओर गए तो वहीं विष्णु जी उसके अंत की खोज में ऊपर की ओर.

ब्रह्माजी के साथ एक केतकी फूल भी नीचे आ रहा है. जब ब्रह्मा जी को ज्योतिर्लिंग का छोर नहीं मिला तो उन्होंने शिव के समक्ष झूठ बोल दिया कि उन्हें उसका एक सिरा मिल गया है और अपने इस झूठ में केतकी के फूल को भी शामिल कर गवाह बना लिया.

ब्रह्म देव के झूठ से शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रह्मा जी का पांचवा से धड़ से अलग कर दिया. वहीं केतकी के फूल को शाप दिया कि आज के बाद शिव पूजा में तुम्हें वर्जित माना जाएगा.

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