Wednesday, July 17, 2024

बादल कब, क्यों और कैसे फटता है, जान लें बचने का तरीका…

बारिश के मौसम में बदल आसमानी कहर बरपाते हैं. मॉनसून आते ही बादल फटने की घटनाएं सामने आती हैं. कई बार बादल फटने की घटना से जान-माल का भारी नुकसान देखने को मिलता है. पिछले महीने हिमाचल प्रदेश के सोलन और हमीरपुर जिलों में बादल फटने की घटनाएं हुई हैं. इससे अचनाक बाढ़ आ गई और भारी नुकसान हुआ. आइए जानते हैं कब, क्यों और कैसे फटता है बादल और इससे बचने का तरीका.

बादल फटना क्या है?

मौसम विज्ञान की माने तो अगर किसी भी जगह पर 1 घंटे में 10 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होती है तो इस घटना को बादल का फटना कहते हैं. वैज्ञानिक भाषा में ‘क्लाउडबर्स्ट’ या ‘फ्लैश फ्लड’ भी कहा जाता है. ‘अचानक, बहुत भारी बारिश होना’ ही बादल फटना है. बादल फटने की घटना में बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होती है.

बादल कब फटता है?

बादल फटने की घटना तब होती है जब भारी मात्रा में नमी वाले बादल एक जगह इक्कठा हो जाते हैं. ऐसा होने से वहां मौजूद पानी की बूंदें आपस में एक साथ मिल जाती हैं. बूंदों का भार इतना ज्यादा हो जाता है कि बादल की डेंसिटी बढ़ जाती है. डेंसिटी बढ़ने से अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती है.

ज्यादातर पहाड़ों में क्यों फटता है बादल?

सामान्य तौर पर धरती की सतह से 12-15 किलोमीटर की ऊंचाई पर बादल फटने की घटना होती है. पहाड़ों की ऊंचाई की वजह से बादल आगे नहीं बढ़ पाते. फिर अचानक एक ही स्थान पर तेज़ बारिश होने लगती है. चंद सेकेंड में 2 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हो जाती है. पहाड़ों पर अमूमन 15 किमी की ऊंचाई पर बादल फटते हैं.

बादल फटने के प्रभाव क्या हैं?

बादल फटने से अचानक बाढ़ आ सकती है. इमारतों, घरों, सड़कों और अन्य संपत्ति को भी नुकसान हो सकता है क्योंकि भारी बारिश होती है, पेड़-पौधों और फसलों को नुकसान होता है, पहाड़ी और पहाड़ी इलाकों में बादल फटने से होने वाली अचानक भारी बारिश से भूस्खलन हो सकता है. इसके अलावा भारी वर्षा के दौरान बादल फटने पर बिजली कटौती और लंबे समय तक ब्लैकआउट आम बात है.

बादल फटने के बाद कैसे बचें?

आपके आस-पास बादल फटने की स्थिति में सुरक्षित रहने के लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको शांत रहना चाहिए. आपातकालीन स्थिति में घबराहट कभी भी मदद नहीं करती है, इसके बजाय आपको अपने बारे में समझदारी रखनी चाहिए और अपनी सुरक्षा और अपने आस-पास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. बाहर जाने से बचें. भारी वर्षा के दौरान ब्लैकआउट आम बात है. ऐसे में जनरेटर या यूपीएस जैसा बैकअप पावर स्रोत पहले से तैयार रख सकते हैं. बारिश में खड़े न रहें या बाढ़ वाले इलाकों के पास न जाएं. खुद को करंट लगने से बचाने के लिए बिजली के खंभों या तारों से दूर रहें. आपकी सुरक्षा के लिए बाढ़ वाले क्षेत्रों और मौसम की भविष्यवाणी जैसी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए ताजा समाचारों पर अपडेट रहना जरूरी है. आपातकालीन किट काम आ सकती हैं.

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