Saturday, July 13, 2024

बकरी, कुतिया से ही नहीं लाशों से भी होता है रेप,जानिए, क्या कहते हैं सेक्सॉलजिस्ट…

लखनऊ

बुजुर्ग महिलाओं से, नवजात से, दुधमुंही, नाबालिग बच्चियों से रेप की खबरें सामने आती रही हैं। फरीदाबाद के सराय ख्वाजा इलाके में एक पांच वर्षीय बच्ची की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ रेप की खबर ने लोगों के जेहन में दहशत पैदा कर दी थी। इन सबके इतर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसे सुनकर सब हैरान रह गए। दरअसल, हरियाणा के मेवात में एक बकरी से कथित तौर पर आठ लोगों द्वारा बलात्कार किया गया। आरोप है कि बलात्कार के एक दिन बाद ही बकरी की मौत हो गई। घटना के बाद 26 जुलाई को असलू नाम के व्यक्ति ने मामले की शिकायत दर्ज कराई। मेवात में बकरी के साथ बलात्कार के मामले में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने नशे की हालत में इस वारदात को अंजाम दिया।

सवाल यह उठता है कि क्या यह कोई पहला मामला है। बता दें कि ऐसे कई मामले काफी लंबे समय से आते रहे हैं जब इंसानों द्वारा पशुओं के साथ रेप किया गया है। किसी व्यक्ति द्वारा पशु के साथ किए गए इंटरकोर्स को बेस्टिऐलिटी यानी पशुगमन नाम दिया जाता है। ऐसे ही कुछ मामलों में से है उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में सिंघावली की घटना, जहां पर अहीर थाना पुलिस ने चिरचिटा गांव के कल्लू पुत्र जानू की तहरीर पर 6 जुलाई को कुतिया से रेप करने का एक मामला दर्ज किया गया था।

बागपत में युवक पर लगा कुतिया से रेप का आरोप

‘नशे की वजह से फ्रंटल ब्रेन कर देता है काम करना’

लखनऊ के जानेमाने साइकायट्रिस्ट और सेक्सॉलजिस्ट डॉक्टर विकास दीक्षित ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत की। उन्होंने बताया, ‘बेस्टिऐलिटी में कई फैक्टर्स हो सकते हैं। पशु और मानव दिमाग में अंतर फ्रंटल ब्रेन की वजह से होता है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि यह ‘विवेक’ यानी समझ का हिस्सा होता है। यदि ज्यादा नशा कर लेते हैं तो यह हिस्सा काम करना बंद कर देता है। इसके बाद हाइंड ब्रेन यानी पीछेवाला जो मस्तिष्क होता है, उसे मजे से मतलब होता है। इंसान उस अवस्था में कुछ भी कर सकता है।’

बछड़े के साथ अप्रकाकृतिक कृत्य

हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित 18 मार्च 2017 की एक ख़बर के मुताबिक, जयपुर में पुलिस ने एक 27 वर्षीय मोहम्मद इकबाल नाम के शख्स को एक बछड़े के साथ अप्राकृतिक कृत्य करते हुए पकड़ा गया। पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, घटना के बाद देखा गया कि बछड़े के गुप्तांगों से खून बह रहा था। यही नहीं, आरोपी ने अपना गुनाह कबूला और बताया कि वह दो बार पशु के साथ ऐसा कर चुका है।

गाय के साथ सेक्स करते पकड़ा गया था शख्स

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित वर्ष 2013 की एक ख़बर के अनुसार, इंदौर में हवाई अड्डे के नजदीक एक शख्स को गाय के साथ सेक्स करते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद उसकी जमकर पिटाई की गई। इसके बाद पुलिस ने 40 वर्षीय गुलाब सिंह नाम के शख्स को गिरफ्तार कर लिया था।

नैशनल सेंटर फॉर बायॉटेक्नॉलजी इन्फर्मेशन (एनसीबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक 18 वर्षीय युवक ने दो बछड़ों के साथ रेप किया था। यही नहीं, इस दौरान एक बछड़े की मौत हो गई थी।

ऐसे लगाई जा सकती है लगाम

बेस्टिऐलिटी के बारे में डॉ. विकास दीक्षित कहते हैं, ‘यह एक मनोविकार है। इसका मुख्य कारण कई चीजें हैं जैसे कि आपकी जरूरत, सेक्स के लिए उपलब्धता और किस लेवल तक जा सकते हैं। इन अपराधों पर लगाम कसने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है जागरूकता। हस्तमैथुन को कई लोग गलत मानते हैं, कहते हैं इससे बीमारियां हो जाएंगी तो जरूरत है कि इन सबके बारे में लोगों को जानकारी दी जाए। हां, इसके साथ ही रेप जैसे मामलों में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए।’

‘नेक्रोफीलिया से ग्रसित होते हैं शवों के साथ सेक्स करनेवाले’

लखनऊ के ही चर्चित साइकायट्रिस्ट डॉक्टर मलयकांत सिंह बेस्टिऐलिटी के बारे में बताया, ‘इन्हें सेक्शुअली परवर्ट कहा जाता है, जो सेक्शुअल एक्साइटमेंट किसी और चीज से होता है। साइकायट्रिस्ट डिसऑर्डर में यह क्लासीफाई किया गया है। पशुओं के साथ सेक्स परवर्जन कहा जाता है। शवों के साथ सेक्स जो करते हैं उन्हें नेक्रोफीलिया नामक बीमारी से ग्रसित बताया जाता है। इस तरह के कई और प्रकार हैं। नॉनलिविंग ऑब्जेक्ट्स को भी क्लासीफाई किया गया है। यह नॉर्मल नहीं है। परवर्ट लोगों को नॉर्मल नहीं माना जाता है।’

बेस्टिऐलिटी में कितनी कारगर है अवर्सिव थेरेपी?

कहा जाता है कि अवर्सिव थेरेपी से इसका इलाज किया जाता है इस सवाल के जवाब में डॉ. मलयकांत ने बताया, ‘अवर्सिव थेरेपी मतलब यह कि जैसे कि महावत हाथी चलाता है और इधर-उधर भागने पर भाला चुभोता है। एक तरह से सजा देना। यह बहुत चर्चित नहीं है। साइकायट्रिस्ट जैसे लक्षण देखता है वैसे ही इलाज करता है।’

क्या हैं परवर्जन की वजहें?

परवर्जन की वजहों के बारे में डॉक्टर मलयकांत कहते हैं, ‘सेक्शुअल इनक्लाइमेशन (झुकाव) बचपन से धीरे-धीरे विकसित होता है। साइकलॉजिकल प्रॉब्लम होने से, इन्वाइरनमेंट में दिक्कत होने से रुझान इस तरफ डिवेलप हो जाता है। नॉर्मल से ज्यादा अप्राकृतिक चीजें अच्छी लगने लगती हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता बहुत जरूरी होती है।’

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